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अमेरिकी नियामक SEC ने क्रिप्टो नियमों पर मतदान अचानक टाला, उद्योग को लंबे इंतजार का डर
अमेरिका की प्रतिभूति नियामक संस्था SEC ने 14 अगस्त को होने वाली वह अहम बैठक रद्द कर दी, जिसमें क्रिप्टो स्टार्टअप्स के लिए पूंजी जुटाने संबंधी छूट पर मतदान होना था। संस्था ने इसे अप्रत्याशित समय-निर्धारण समस्या बताया, लेकिन कोई नई तारीख नहीं दी।
अमेरिका की प्रमुख प्रतिभूति नियामक संस्था, सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन यानी SEC ने क्रिप्टो जगत को चौंका दिया है। संस्था ने 14 अगस्त को निर्धारित वह खुली बैठक अचानक रद्द कर दी, जिसमें डिजिटल संपत्तियों से जुड़े कुछ बेहद अहम नियमों पर मतदान होना था।
SEC ने इस फैसले की वजह एक अप्रत्याशित समय-निर्धारण समस्या बताई है। संस्था के प्रवक्ता के अनुसार, बैठक को किसी बाद की तारीख के लिए टाल दिया गया है, लेकिन नई तारीख के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। इससे उद्योग में पहले से मौजूद अनिश्चितता और बढ़ गई है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बैठक से क्रिप्टो कंपनियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी। प्रस्तावित नियम स्टार्टअप्स के लिए पूंजी जुटाना आसान बनाने वाले थे, वह भी पारंपरिक प्रतिभूति कानूनों के भारी बोझ के बिना। इसी कारण पूरा उद्योग इस पर लंबे समय से नजर गड़ाए हुए था।
क्या होना था बैठक में
प्रस्तावित नियमों का मुख्य उद्देश्य क्रिप्टो स्टार्टअप्स को कुछ खास छूट देना था। इनमें एक उद्देश्य के अनुकूल स्टार्टअप छूट शामिल थी, जिसके तहत नई क्रिप्टो कंपनियां एक तय अवधि तक SEC की सख्त निगरानी से मुक्त होकर धन जुटा सकती थीं या अपना कारोबार चला सकती थीं।
इसके अलावा टोकन की बिक्री के लिए एक तथाकथित सुरक्षित ठिकाना और नवाचार से जुड़ी एक अलग छूट पर भी विचार किया जा रहा था। इसका मकसद ब्लॉकचेन आधारित नए कारोबारी मॉडल्स के साथ प्रयोग करने की गुंजाइश देना था, ताकि इस क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिल सके।
क्यों टली बैठक
यह पहली बार नहीं है जब ऐसी बैठक टाली गई हो। लगातार होती इन देरी ने बाजार में यह अटकल तेज कर दी है कि SEC शायद जानबूझकर अपना नियमन कैलेंडर खुला रख रही है। संस्था संभवतः तब तक इंतजार करना चाहती है, जब तक अमेरिकी संसद किसी बड़े कानून पर स्पष्ट रुख नहीं अपना लेती।
नेतृत्व में बदलाव के बाद SEC का रवैया भी बदला है। मौजूदा अध्यक्ष पॉल एटकिन्स के कार्यकाल में संस्था क्रिप्टो और टोकन बाजारों के प्रति पहले से कहीं अधिक उदार रुख अपना रही है। यह पहले वाली सख्त, प्रवर्तन-केंद्रित नीति से एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
कानून का अटका मामला

इस पूरी कहानी की जड़ में एक अटका हुआ कानून है। यह बैठक ठीक उस समय टली, जब अमेरिकी सीनेट बिना मतदान के स्थगित हो गई। सीनेट को क्लैरिटी एक्ट यानी डिजिटल एसेट मार्केट क्लैरिटी एक्ट पर फैसला लेना था, जिसे उद्योग अपनी सबसे बड़ी विधायी प्राथमिकता मानता है।
यह कानून अमेरिका में क्रिप्टो के लिए एक स्पष्ट संघीय ढांचा तय करने वाला है। इसमें यह भी तय होना है कि किस संपत्ति पर SEC का अधिकार रहेगा और किस पर वस्तु वायदा नियामक CFTC का। जब तक संसद इस पर आगे नहीं बढ़ती, तब तक नियामकों के लिए भी अपनी दिशा तय करना मुश्किल बना रहेगा।
दरअसल, अमेरिका में डिजिटल संपत्तियों पर नियंत्रण किसके पास हो, यह लंबे समय से बहस का विषय रहा है। प्रस्तावित कानून के तहत यह जिम्मेदारी SEC और CFTC के बीच बांटने की बात है। इसी अनिश्चितता के बीच SEC का अपने ही प्रस्तावित नियमों पर मतदान टाल देना पूरी प्रक्रिया की उलझन को साफ दर्शाता है।
इसका क्या मतलब है
विश्लेषकों के अनुसार, इस देरी का व्यावहारिक असर काफी साफ है। जो नियम इस साल आने की उम्मीद थी, उनके आने में अब और अधिक वक्त लग सकता है। कंपनियों को सलाह दी जा रही है कि वे नियमों के जल्द लागू होने की उम्मीद पर योजना न बनाएं, बल्कि एक लंबी प्रतीक्षा के लिए तैयार रहें।
अमेरिका में बनने वाले ये नियम केवल वहीं तक सीमित नहीं रहते। दुनिया भर के, यहां तक कि भारत के निवेशक और कंपनियां भी इन पर नजर रखती हैं, क्योंकि अमेरिकी नीति अक्सर वैश्विक क्रिप्टो बाजार की दिशा तय करती है। फिलहाल स्पष्टता के बजाय इंतजार ही सबके हिस्से आया है।





