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भारत में क्रिप्टो कर नियम 2026 में दुनिया के सबसे सख्त बने हुए, आरबीआई का रुख और कड़ा
साल 2026 में भारत की क्रिप्टोकरेंसी नीति और सख्त हुई है। 30 प्रतिशत कर और एक प्रतिशत टीडीएस बरकरार है, अनुपालन नियम कड़े हुए हैं और आरबीआई ने वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों को वैध न बनाने की सिफारिश की है।
साल 2026 में भारत की क्रिप्टोकरेंसी को लेकर नीति और अधिक सख्त हो गई है। सरकार ने पूर्ण प्रतिबंध का रास्ता तो नहीं चुना, लेकिन कड़े नियंत्रण, बढ़ी हुई निगरानी और मजबूत प्रवर्तन की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। यह रुख निवेशकों के लिए स्पष्ट संकेत है कि छूट के बजाय पारदर्शिता और अनुशासन पर जोर रहेगा।
दुनिया की सबसे कठोर कर व्यवस्था
भारत में वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों पर कर की व्यवस्था दुनिया की सबसे सख्त मानी जाती है। किसी भी क्रिप्टो लाभ पर सीधे 30 प्रतिशत की दर से कर लगता है, जिसमें चार प्रतिशत स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर जोड़ने के बाद प्रभावी दर 31.2 प्रतिशत हो जाती है। यह दर आयकर अधिनियम की धारा 115बीबीएच के अंतर्गत तय की गई है।
इस कर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह संपत्ति रखने की अवधि पर निर्भर नहीं करता। चाहे निवेशक ने कुछ घंटों के लिए क्रिप्टो रखा हो या कई वर्षों के लिए, लाभ पर वही 30 प्रतिशत कर देना होगा। यह चाहे मुख्य आय हो या केवल एक अतिरिक्त कमाई, नियम में कोई ढील नहीं दी गई है।
इसके अतिरिक्त, हर लेनदेन पर आयकर अधिनियम की धारा 194एस के तहत एक प्रतिशत की दर से स्रोत पर कर कटौती यानी टीडीएस लागू होती है। निर्दिष्ट व्यक्तियों के लिए यह सीमा प्रति वित्तीय वर्ष 50 हजार रुपये है, जबकि अन्य के लिए यह सीमा केवल 10 हजार रुपये रखी गई है, जिसे एक्सचेंज स्वयं काट लेते हैं।
निवेशकों के लिए एक और कठिन पहलू घाटे से जुड़ा है। नियमों के अनुसार, एक क्रिप्टो संपत्ति से हुए घाटे को दूसरी क्रिप्टो संपत्ति के लाभ या वेतन, व्यवसाय अथवा किराये जैसी किसी अन्य आय के विरुद्ध समायोजित नहीं किया जा सकता। इतना ही नहीं, इन घाटों को अगले वर्षों के लिए आगे भी नहीं ले जाया जा सकता।
अनुपालन नियम हुए और सख्त

हालांकि कर की दरें पहले जैसी ही रहीं, लेकिन अनुपालन के नियम काफी कड़े कर दिए गए हैं। एक अप्रैल 2026 से लागू व्यवस्था के अनुसार, वीडीए विवरण जमा न करने पर प्रतिदिन 200 रुपये का जुर्माना लगेगा। गलत जानकारी देने पर 50 हजार रुपये तक तथा आय कम बताने पर देय कर का 50 से 200 प्रतिशत तक दंड निर्धारित किया गया है।
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक अप्रैल 2026 से एक्सचेंजों को सीधे आयकर विभाग के साथ लेनदेन का विस्तृत डेटा साझा करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2023-24 से लेनदेन के स्तर पर रिपोर्टिंग के लिए शेड्यूल वीडीए भी अनिवार्य किया गया था, जिससे कर अधिकारियों की निगरानी और मजबूत हुई है।
करदाताओं के लिए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई थी। इस पूरे ढांचे की नींव वित्त अधिनियम 2022 में रखी गई थी, जबकि वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों की परिभाषा आयकर अधिनियम की धारा 2(47ए) में स्पष्ट रूप से दी गई है।
निवेशकों की बड़ी संख्या
कठोर नियमों के बावजूद भारत में क्रिप्टो निवेशकों की संख्या उल्लेखनीय बनी हुई है। कर विभाग के अनुमान के अनुसार, मई 2026 के अंत तक देश में लगभग 3.9 करोड़ क्रिप्टो निवेशक थे, जिनके पास करीब 2.1 अरब डॉलर मूल्य की संपत्तियां थीं। जुलाई 2026 तक 54 वीडीए सेवा प्रदाता एफआईयू-इंडिया के साथ पंजीकृत हो चुके थे।
हालांकि अनुपालन की स्थिति चिंताजनक रही है। आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023 में लगभग 6 लाख 45 हजार क्रिप्टो व्यापारियों में से 25 प्रतिशत से भी कम ने अपने कर रिटर्न में अपनी संपत्तियों की जानकारी दी थी। यही कारण है कि सरकार अब रिपोर्टिंग और प्रवर्तन को लगातार कड़ा कर रही है।
आरबीआई का कड़ा रुख
भारतीय रिजर्व बैंक का रुख इस मामले में सबसे स्पष्ट है। दो जुलाई 2026 को आरबीआई ने संसदीय स्थायी समिति के समक्ष कहा कि वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों को वैध नहीं बनाया जाना चाहिए। केंद्रीय बैंक इनके स्थान पर डिजिटल रुपये को एक सुरक्षित विकल्प के रूप में आगे बढ़ा रहा है और नियंत्रण की नीति पर कायम है।
नियामक ढांचे में विभिन्न संस्थाओं की भूमिका बंटी हुई है। जहां आरबीआई मुद्रा नीति और सीबीडीसी की देखरेख करता है, वहीं सेबी भविष्य में वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों को प्रतिभूतियों के रूप में विनियमित करने वाली संस्था बन सकती है। एफआईयू-इंडिया मनी लॉन्ड्रिंग रोधी नियमों और पंजीकरण पर नजर रखता है।
प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई
साल 2026 में प्रवर्तन एजेंसियों ने भी सक्रियता दिखाई है। प्रवर्तन निदेशालय ने 15 जून को 500 करोड़ रुपये के कोर्वियो कॉइन पोंजी घोटाले में गिरफ्तारी की। इसके दो दिन बाद 17 जून को बेंगलुरु की पांच कंपनियों पर लगभग 2500 करोड़ रुपये के अनधिकृत स्टेबलकॉइन हस्तांतरण के आरोप में छापे मारे गए, जिनमें करीब 6 करोड़ रुपये फ्रीज किए गए।
एक और बड़ी चिंता व्यापार के देश से बाहर जाने की है। बजट चर्चा के दौरान सांसद राघव चड्ढा ने बताया कि भारत का लगभग 72.7 प्रतिशत क्रिप्टो व्यापार अब विदेशी मंचों पर हो रहा है। यह आंकड़ा दिखाता है कि अत्यधिक कर और अनिश्चितता के कारण बड़ी संख्या में निवेशक भारतीय एक्सचेंजों से दूर जा रहे हैं।





