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बिटमाइन बनी दुनिया की सबसे बड़ी एथेरियम तिजोरी, कुल ETH आपूर्ति का 4.8% अब एक ही कंपनी के पास
अमेरिकी कंपनी बिटमाइन इमर्शन टेक्नोलॉजीज ने अपने एथेरियम भंडार को बढ़ाकर 58 लाख ETH से अधिक कर लिया है, जो कुल आपूर्ति का 4.8 प्रतिशत है और जिसकी कीमत करीब 11 अरब डॉलर आंकी गई है। कंपनी अब कुल ETH आपूर्ति का 5 प्रतिशत हासिल करने के अपने लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच चुकी है।
अमेरिकी शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनी बिटमाइन इमर्शन टेक्नोलॉजीज दुनिया की सबसे बड़ी कॉर्पोरेट एथेरियम तिजोरी बन गई है। कंपनी के पास अब कुल 58 लाख से अधिक ETH यानी ठीक 5,815,164 टोकन हैं, जो एथेरियम की कुल आपूर्ति का 4.8 प्रतिशत है। इस भंडार की कुल कीमत करीब 11 अरब डॉलर आंकी गई है।
यह आंकड़ा 17 अगस्त को सामने आया, जब कंपनी ने बीते एक सप्ताह में और 9,926 ETH खरीदने की जानकारी दी। एथेरियम की कुल आपूर्ति लगभग 12.07 करोड़ टोकन है, और इसी में से बिटमाइन लगातार बड़ी मात्रा में खरीदकर अपना हिस्सा तेजी से बढ़ाती जा रही है।
कंपनी ने अपने इस लक्ष्य को एक खास नाम दिया है, जिसे वह अल्केमी ऑफ फाइव पर्सेंट कहती है। इसका मतलब है कि बिटमाइन एथेरियम की कुल आपूर्ति का पूरा 5 प्रतिशत अपने पास जमा करना चाहती है। मौजूदा 4.8 प्रतिशत हिस्से के साथ कंपनी अपने इस लक्ष्य के 96 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।
टॉम ली का बड़ा दांव

इस रणनीति के पीछे वॉल स्ट्रीट के जाने माने विश्लेषक टॉम ली हैं, जो बिटमाइन के चेयरमैन हैं। यह तरीका काफी हद तक उसी मॉडल जैसा है जिसमें कुछ कंपनियां बिटकॉइन को अपनी बैलेंस शीट पर रिजर्व की तरह जमा करती हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि यहां भंडार बिटकॉइन का नहीं, बल्कि एथेरियम का है।
बिटमाइन सिर्फ ETH जमा ही नहीं कर रही, बल्कि उससे कमाई भी कर रही है। कंपनी ने अपने 50 लाख से ज्यादा टोकन, यानी करीब 9.6 अरब डॉलर मूल्य के 87 प्रतिशत भंडार को मावन प्लेटफॉर्म और साझेदारों के जरिए स्टेक किया हुआ है। इससे सालाना करीब 25 करोड़ डॉलर की स्टेकिंग आमदनी होने का अनुमान है।
कीमत के लिहाज से देखें तो कंपनी ने अपने आकलन में एक ETH की कीमत 1,893 डॉलर मानी है, और सोमवार को एथेरियम 1,900 डॉलर के ऊपर कारोबार कर रहा था। हालांकि यह कीमत पिछले साल अगस्त में बने 4,946.05 डॉलर के सर्वकालिक उच्चतम स्तर से अब भी करीब 61.7 प्रतिशत नीचे है।
और क्या रखती है बिटमाइन
एथेरियम बिटमाइन का मुख्य दांव है, लेकिन एकमात्र नहीं। कंपनी के पास करीब 209 से 210 बिटकॉइन भी हैं। इसके अलावा उसने बीस्ट इंडस्ट्रीज में 18 करोड़ डॉलर और एटको होल्डिंग्स में 7.3 करोड़ डॉलर का निवेश किया हुआ है, जिससे उसका पोर्टफोलियो कई हिस्सों में फैला हुआ है।
हाल ही में कंपनी ने अपने ही 17 लाख शेयर वापस खरीदे हैं, जो निवेशकों को यह भरोसा देने की कोशिश है कि प्रबंधन अपनी रणनीति पर पूरी तरह कायम है। कुल मिलाकर बिटमाइन खुद को एथेरियम पर केंद्रित एक ट्रेजरी कंपनी के रूप में स्थापित कर रही है।
निवेशकों के लिए इसके मायने
किसी एक कंपनी के पास एथेरियम की कुल आपूर्ति का 4.8 प्रतिशत होना बाजार के लिए दोधारी संकेत है। एक ओर यह संस्थागत मांग के मजबूत होने का प्रमाण है, तो दूसरी ओर इतनी बड़ी मात्रा एक ही जगह जमा होने से आपूर्ति के केंद्रीकरण और जोखिम को लेकर सवाल भी खड़े होते हैं।
जोखिम का सबसे बड़ा पहलू कीमत का उतार चढ़ाव है। जब एथेरियम अपने शिखर से 61.7 प्रतिशत नीचे है, तब 11 अरब डॉलर की यह पोजीशन कीमत के हर झटके के साथ भारी घटती बढ़ती है। स्टेकिंग से मिलने वाली आमदनी कुछ सहारा जरूर देती है, पर ट्रेजरी मॉडल फायदे और नुकसान दोनों को कई गुना बढ़ा देता है।
भारतीय निवेशकों के लिए यह खबर एक अहम संकेत है, क्योंकि इस तरह की बड़ी संस्थागत खरीद अक्सर वैश्विक मांग की दिशा दिखाती है। हालांकि भारत में क्रिप्टो पर 30 प्रतिशत टैक्स और हर लेनदेन पर 1 प्रतिशत टीडीएस जैसे भारी नियमों के चलते घरेलू स्तर पर ऐसी बड़ी कंपनी तिजोरियां अब भी बेहद दुर्लभ हैं।
आगे की राह इस पर टिकी है कि बिटमाइन अपने 5 प्रतिशत के लक्ष्य तक पहुंच पाती है या नहीं, और एथेरियम की कीमत लंबे समय में किस दिशा में जाती है। यदि ETH अपने शिखर से काफी नीचे बना रहता है, तो इस पूरे ट्रेजरी मॉडल की असली परीक्षा स्टेकिंग आमदनी और कंपनी के धैर्य से ही होगी।





