Ananya IyerVIEW PROFILE →
सिर्फ़ ट्रेडिंग नहीं, अब निर्माण भी: कैसे भारत बन रहा है दुनिया का सबसे बड़ा Web3 डेवलपर हब
भारत को अक्सर करोड़ों क्रिप्टो उपयोगकर्ताओं के देश के रूप में देखा जाता है, लेकिन एक और कहानी तेज़ी से बन रही है: रिपोर्टों के अनुसार भारत दुनिया का सबसे बड़ा Web3 डेवलपर हब बनने की राह पर है।
भारत को अक्सर क्रिप्टो के 'उपयोगकर्ताओं' के देश के रूप में देखा जाता है, जहाँ करोड़ों लोग डिजिटल संपत्तियों में निवेश करते हैं। लेकिन एक और, अपेक्षाकृत कम चर्चित कहानी तेज़ी से आकार ले रही है: भारत अब सिर्फ़ क्रिप्टो खरीदने-बेचने वाला नहीं, बल्कि उसे बनाने वाला देश बनता जा रहा है। कई रिपोर्टों के अनुसार, देश दुनिया का सबसे बड़ा Web3 डेवलपर हब बनने की राह पर है।
अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा डेवलपर आधार
आँकड़े इस बदलाव की गवाही देते हैं। एक अनुमान के अनुसार, दुनिया के कुल क्रिप्टो डेवलपर्स में से लगभग 12 प्रतिशत अकेले भारत में हैं, जिससे यह अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा डेवलपर आधार बन गया है। इतना ही नहीं, 2024 में जुड़े नए Web3 डेवलपर्स में भारत की हिस्सेदारी लगभग 17 प्रतिशत रही, जो किसी भी अन्य देश की तुलना में अधिक थी।
युवा, हैकाथॉन और विश्वविद्यालय

इस लहर की सबसे ख़ास बात इसका चेहरा है। इन डेवलपर्स में से ज़्यादातर की उम्र 27 साल से कम है, और बड़ी संख्या हाल के दो-तीन वर्षों में ही इस क्षेत्र में आई है। हैकाथॉन इनके लिए प्रवेश का सबसे लोकप्रिय रास्ता बने हुए हैं, जबकि कई Web3 कंपनियाँ ओडिशा, चेन्नई और केरल जैसे राज्यों के विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर छात्रों को शुरू से ही ब्लॉकचेन तकनीक से परिचित करा रही हैं।
स्टार्टअप और निवेश की रफ़्तार
यह प्रतिभा एक तेज़ी से बढ़ते कारोबारी परिवेश से जुड़ी है। देश में अब 1,200 से अधिक Web3 स्टार्टअप सक्रिय बताए जाते हैं। 2024 में इन स्टार्टअप्स ने मिलकर लगभग 56 करोड़ डॉलर से अधिक की पूँजी जुटाई, जो पिछले वर्ष की तुलना में दोगुनी से भी ज़्यादा वृद्धि है। यह दिखाता है कि निवेशकों का भरोसा सिर्फ़ कीमतों में नहीं, बल्कि असल निर्माण में भी बढ़ रहा है।
एक नहीं, कई मोर्चों पर काम
भारतीय डेवलपर्स का ध्यान किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। गेमिंग, एनएफटी, विकेंद्रीकृत वित्त यानी DeFi और वास्तविक दुनिया की संपत्तियों की टोकनाइज़ेशन जैसे कई क्षेत्रों में एक साथ काम हो रहा है। यानी भारत सिर्फ़ किसी एक चलन का अनुसरण नहीं कर रहा, बल्कि ब्लॉकचेन तकनीक के कई अलग-अलग उपयोगों को समानांतर रूप से आगे बढ़ा रहा है।
बेशक, राह में चुनौतियाँ भी हैं। नियामकीय अनिश्चितता और वैश्विक बाज़ार का उतार-चढ़ाव इस विकास की गति को प्रभावित कर सकते हैं। फिर भी, रिपोर्टों का अनुमान है कि आने वाले एक-दो वर्षों में भारत Web3 डेवलपर्स की संख्या के मामले में अमेरिका को भी पीछे छोड़ सकता है। यदि ऐसा हुआ, तो यह देश की डिजिटल कहानी का एक निर्णायक अध्याय होगा।






