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दुनिया में सबसे आगे, फिर भी सबसे ज़्यादा टैक्स: 2026 में भारत का क्रिप्टो विरोधाभास

markets2026-08-30 · 2 min read · 0 reads

क्रिप्टो अपनाने में भारत लगातार तीसरे साल दुनिया में पहले स्थान पर है, पर कर व्यवस्था दुनिया की सबसे कड़ी में से एक है। 2026 के आँकड़ों और नियमन पर एक संतुलित नज़र।

बरसों से बाज़ारों को देखते हुए मैंने सीखा है कि असली कहानी अक्सर आँकड़ों के भीतर छिपी होती है, न कि सुर्खियों में। साल 2026 में भारत का क्रिप्टो बाज़ार ठीक ऐसा ही एक विषय है। यहाँ बात किसी एक कीमत के उतार-चढ़ाव की नहीं, बल्कि एक गहरे विरोधाभास की है, जो मुझे किसी भी अल्पकालिक तेज़ी से कहीं ज़्यादा दिलचस्प लगता है।

अपनाने में दुनिया में पहला

पहले आँकड़ों को देखें। क्रिप्टो अपनाने के मामले में भारत लगातार तीसरे साल दुनिया में पहले स्थान पर है। यहाँ करीब ग्यारह करोड़ नब्बे लाख सक्रिय उपयोगकर्ता हैं, जो इसे सबसे बड़ा क्रिप्टो उपयोगकर्ता आधार बनाता है। जुलाई 2024 से जून 2025 के बीच देश में लगभग 2.36 ट्रिलियन डॉलर का लेनदेन हुआ, जो पिछले साल की तुलना में उनहत्तर प्रतिशत अधिक है।

युवा और बिटकॉइन

इस लहर को कौन चला रहा है, यह भी अहम है। भारतीय निवेशकों में बिटकॉइन सबसे लोकप्रिय बना हुआ है, जिसकी अपनाने की दर लगभग उनहत्तर प्रतिशत है। इससे भी दिलचस्प बात यह है कि यहाँ के लगभग बहत्तर प्रतिशत क्रिप्टो निवेशक पैंतीस साल से कम उम्र के हैं। यानी यह मुख्य रूप से एक युवा पीढ़ी की पूँजी और जोखिम उठाने की प्रवृत्ति से चलने वाला बाज़ार है।

भारी कर का बोझ

अब दूसरे पहलू पर आते हैं। भारत में क्रिप्टो पर कर की व्यवस्था दुनिया की सबसे कड़ी में गिनी जाती है। मुनाफ़े पर तीस प्रतिशत की सपाट दर, हर लेनदेन पर एक प्रतिशत का टीडीएस, और घाटे को दूसरी आय के साथ समायोजित करने पर रोक, यह सब मिलकर निवेशकों पर बड़ा बोझ डालते हैं। ऊँचे अपनाने के बावजूद यह कर ढाँचा बाज़ार पर लगातार दबाव बनाए रखता है।

नियमन की दिशा

नियमों के मोर्चे पर 2026 में रुख अनिश्चितता से हटकर अधिक सख़्ती की ओर बढ़ा है, पर पूर्ण प्रतिबंध की ओर नहीं। अब देश में काम करने वाले सभी एक्सचेंजों और सेवा प्रदाताओं को वित्तीय आसूचना इकाई के पास पंजीकरण कराना, केवाईसी पूरा करना और संदिग्ध लेनदेन की निगरानी अनिवार्य है। यह दिखाता है कि नीति निगरानी बढ़ा रही है, पर तकनीक को पूरी तरह रोकना नहीं चाहती।

मेरा संतुलित नज़रिया

इतने उत्साह के बीच भी मैं अति-आशावाद से बचता हूँ। भारी कर और सख़्त नियमन बड़े हिस्से में कारोबार को विदेशी मंचों की ओर धकेल सकते हैं, और ऊँची अपनाने की दर अपने साथ जोखिम भी लाती है। फिर भी बुनियादी रुझान मुझे स्वस्थ लगता है, क्योंकि बाज़ार धीरे-धीरे परिपक्व और अधिक पारदर्शी हो रहा है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह उत्साह पूरे एक चक्र तक टिक पाता है।

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