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वज़ीरएक्स हैक: 234 मिलियन डॉलर की चोरी के बाद सिंगापुर कोर्ट से पुनर्गठन योजना को मंज़ूरी, यूज़र्स को राहत
जुलाई 2024 में हुए भारत के सबसे बड़े क्रिप्टो हैक के बाद वज़ीरएक्स को सिंगापुर हाई कोर्ट से कर्ज पुनर्गठन योजना की मंज़ूरी मिल गई है। यूज़र्स को खाते की 75 से 80 प्रतिशत राशि वापस मिलने की उम्मीद। पूरी कहानी।
भारत में क्रिप्टोकरेंसी की चर्चा अक्सर टैक्स नियमों, आरबीआई के डिजिटल रुपये और सरकार की नियामक नीति के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। लेकिन इस बीच एक ऐसी कहानी अपने अहम मोड़ पर पहुँची है जो लाखों भारतीय निवेशकों से सीधे जुड़ी है, और वह है देश के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज वज़ीरएक्स पर हुए विशाल साइबर हमले की कहानी।
यह मामला सिर्फ़ एक तकनीकी सुरक्षा चूक नहीं, बल्कि भरोसे, कानूनी लड़ाई और निवेशकों की मेहनत की कमाई से जुड़ा एक बड़ा संकट रहा है। एक साल से ज़्यादा की अनिश्चितता के बाद अब जाकर पीड़ित उपयोगकर्ताओं के लिए राहत की एक ठोस किरण नज़र आई है, जिसकी वे लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे थे।
हैक की पूरी कहानी
यह हमला 18 जुलाई 2024 को हुआ था, जब वज़ीरएक्स को लगभग 234.9 मिलियन डॉलर का भारी नुकसान झेलना पड़ा। यह उद्योग के इतिहास के सबसे बड़े साइबर हमलों में से एक माना जाता है, जिसने पूरे भारतीय क्रिप्टो बाज़ार को हिलाकर रख दिया और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
रिपोर्टों के अनुसार, इस कुख्यात साइबर हमले को उत्तर कोरिया के बदनाम हैकिंग समूह लाज़रस ने अंजाम दिया था। यह वही समूह है जिसे दुनिया भर में कई बड़े क्रिप्टो एक्सचेंजों पर हमलों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाता रहा है, और इसकी संलिप्तता मामले की गंभीरता को और बढ़ा देती है।
इस चोरी के बाद वज़ीरएक्स के लाखों उपयोगकर्ताओं के फंड फँस गए और एक्सचेंज की गतिविधियाँ ठप पड़ गईं। निवेशक महीनों तक इस अनिश्चितता में रहे कि क्या उनकी जमा राशि कभी वापस मिल पाएगी, या यह पूरी पूँजी हमेशा के लिए डूब जाएगी।
अदालत की मंज़ूरी और वापसी की योजना

इस लंबी अनिश्चितता का अंत तब हुआ जब सिंगापुर की हाई कोर्ट ने वज़ीरएक्स की कर्ज पुनर्गठन योजना को कुछ संशोधनों के साथ मंज़ूरी दे दी। यह मंज़ूरी उस अहम मतदान के बाद आई जिसमें भारी बहुमत से लेनदारों ने संशोधित योजना का समर्थन किया, जिससे रास्ता साफ़ हो गया।
आँकड़े इस समर्थन की व्यापकता दर्शाते हैं। अगस्त 2025 में हुए पुनर्मतदान में मतदान करने वाले 95.7 प्रतिशत लेनदारों ने, जो मूल्य के हिसाब से 94.6 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते थे, इस संशोधित योजना के पक्ष में मतदान किया, जो निवेशकों की व्यापक सहमति को दर्शाता है।
उपयोगकर्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही था कि उन्हें अपना कितना पैसा वापस मिलेगा। वज़ीरएक्स का अनुमान है कि उपयोगकर्ता टोकन वितरण के माध्यम से अपने खाते की शेष राशि का लगभग 75 से 80 प्रतिशत तक वापस प्राप्त कर सकते हैं, जो परिस्थितियों को देखते हुए एक बड़ी राहत है।
पुनर्गठन का ढाँचा
यह पूरी पुनर्गठन योजना वज़ीरएक्स की मूल कंपनी ज़ेट्टाई द्वारा दायर की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य कंपनी को दिवालिया होने से बचाते हुए, एक अदालत-निगरानी वाली प्रक्रिया के ज़रिए लेनदारों की अधिकतम वसूली सुनिश्चित करना था, ताकि निवेशकों का नुकसान कम से कम हो सके।
प्रक्रिया के तहत, हाई कोर्ट की मंज़ूरी के बाद यह योजना औपचारिक रूप से सिंगापुर की लेखा एवं कॉर्पोरेट नियामक प्राधिकरण यानी एसीआरए के समक्ष प्रस्तुत की गई। योजना के कानूनी रूप से प्रभावी होते ही एक्सचेंज ने दस कार्य दिवसों के भीतर अपनी गतिविधियाँ फिर से शुरू करने की बात कही है।
एक और अहम बात अदालती सुनवाई में सामने आई, जहाँ यह पाया गया कि इस साइबर हमले में वज़ीरएक्स की ओर से किसी गलत काम या कदाचार का कोई सबूत नहीं था। यह निष्कर्ष एक्सचेंज के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हमले को एक बाहरी आपराधिक कृत्य के रूप में स्थापित करता है।
भारतीय निवेशकों के लिए मायने
यह घटनाक्रम भारत के करोड़ों क्रिप्टो उपयोगकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल पेश करता है। यह दिखाता है कि किसी बड़ी सुरक्षा चूक के बाद भी, एक संरचित और अदालत-निगरानी वाली प्रक्रिया के ज़रिए निवेशकों की पूँजी का एक बड़ा हिस्सा बचाया जा सकता है, भले ही इसमें लंबा समय लगे।
साथ ही, यह पूरा प्रकरण क्रिप्टो एक्सचेंजों में मज़बूत सुरक्षा और पारदर्शिता की ज़रूरत को भी रेखांकित करता है। जैसे-जैसे भारत में डिजिटल संपत्तियों को अपनाने की रफ़्तार बढ़ रही है, निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों से सीखे गए सबक आने वाले वर्षों में बेहद अहम साबित होंगे।






